क्या Sahara की तरह डूब जाएगा LIC का पैसा? जानिए Rajesh Exports विवाद की पूरी सच्चाई

भारत के शेयर बाजार में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है Rajesh Exports। SEBI ने कंपनी पर करीब ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व में कथित गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कंपनी में 10.8% हिस्सेदारी रखने वाली LIC का पैसा कहीं Sahara जैसी कहानी तो नहीं बन जाएगा?

आखिर मामला क्या है?

SEBI की अंतरिम जांच के अनुसार Rajesh Exports ने FY21 से FY25 के बीच अपने राजस्व आंकड़ों को कथित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। नियामक ने कंपनी के प्रमोटर Rajesh Mehta पर भी कार्रवाई की है और जांच जारी है। वहीं कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह “गलतफहमी” का मामला है और उसके वित्तीय आंकड़े सही हैं।

LIC का कितना पैसा फंसा है?

मार्च 2026 तक LIC की Rajesh Exports में लगभग 10.8% हिस्सेदारी थी। मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से इस हिस्सेदारी की कीमत करीब ₹340 करोड़ आंकी जा रही है।

यह सुनकर कई लोगों को डर लग सकता है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी।

क्या यह Sahara जैसा मामला है?

जवाब है – नहीं, अभी ऐसा कहना गलत होगा।

Sahara मामले में लाखों निवेशकों का पैसा सीधे कंपनी की योजनाओं में लगा हुआ था और भुगतान को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया था। LIC का मामला अलग है।

LIC एक विशाल संस्थागत निवेशक है, जिसके पास लाखों करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। Rajesh Exports में उसकी हिस्सेदारी उसके कुल निवेश पोर्टफोलियो का बेहद छोटा हिस्सा है। अगर सबसे खराब स्थिति में भी Rajesh Exports का शेयर शून्य हो जाए, तब भी LIC के पूरे बिजनेस पर कोई बड़ा अस्तित्वगत खतरा नहीं आएगा।

फिर चिंता किस बात की है?

चिंता के दो कारण है 

1. निवेश प्रक्रिया पर सवाल

कई निवेशकों का सवाल है कि जब कुछ बड़े म्यूचुअल फंड और बैंक इस कंपनी से दूरी बना चुके थे, तब LIC ने इतनी बड़ी हिस्सेदारी क्यों बनाए रखी? यह सवाल अब राजनीतिक और बाजार दोनों स्तर पर उठ रहा है।

2. पॉलिसीहोल्डर्स का भरोसा

LIC सिर्फ एक निवेशक नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की बचत का प्रतीक है। ऐसे में अगर किसी विवादित कंपनी में उसका निवेश फंसता है तो लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है, भले ही वास्तविक वित्तीय नुकसान सीमित हो।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

इस समय सबसे जरूरी बात है कि SEBI की जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए। अभी जो आरोप लगाए गए हैं, वे प्रारंभिक निष्कर्ष हैं। अंतिम फैसला आना बाकी है और कंपनी ने आरोपों का खंडन भी किया है।

Rajesh Exports विवाद गंभीर जरूर है, लेकिन इसे Sahara जैसी तबाही बताना अभी जल्दबाजी होगी। LIC की लगभग ₹340 करोड़ की हिस्सेदारी चर्चा का विषय है, लेकिन LIC के विशाल आकार को देखते हुए यह उसके कुल निवेश का बहुत छोटा हिस्सा है। असली सवाल यह नहीं है कि LIC डूब जाएगी या नहीं, बल्कि यह है कि देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशक ने इस कंपनी में इतना भरोसा क्यों बनाए रखा।

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