भारत में क्यों बंद हुआ 7-Eleven? जानिए बंद होने की पूरी कहानी

भारत में विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करना जितना आकर्षक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण यहां लंबे समय तक टिके रहना भी है। इसका एक उदाहरण 7-Eleven है, जो दुनिया भर में अपने सुविधा स्टोर के लिए जाना जाता है। कंपनी ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन अब इसके भारतीय कारोबार पर विराम लग गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 7-Eleven के सभी 31 स्टोर बंद हो गए हैं। इसके साथ ही मुंबई और पुणे में चल रहे इस ब्रांड के स्टोर भी ग्राहकों के लिए बंद हो गए। इससे सवाल उठता है कि आखिर दुनिया के कई देशों में सफल रहने वाला यह बिजनेस भारत में अपनी जगह क्यों नहीं बना पाया? क्या इसकी वजह भारतीय ग्राहकों की पसंद थी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा थी या बिजनेस मॉडल से जुड़ी कोई चुनौती?
आइए, 7-Eleven के भारत आने से लेकर कारोबार बंद होने तक की पूरी कहानी समझते हैं।

7-Eleven क्या है और इसका बिजनेस मॉडल कैसे काम करता है?

7-Eleven एक अंतरराष्ट्रीय कन्वीनियंस स्टोर ब्रांड है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान आसानी से और जल्दी उपलब्ध कराना है। इन स्टोर पर आमतौर पर पैकेज्ड फूड, स्नैक्स, पेय पदार्थ, चॉकलेट, दूध और दूसरी जरूरी चीजें मिलती हैं।
इस तरह के स्टोर की खासियत यह है कि ग्राहक छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बड़े सुपरमार्केट जाने के बजाय पास के स्टोर से सामान खरीद सकते हैं। विदेशों में कई 7-Eleven स्टोर लंबे समय तक, यहां तक कि 24 घंटे भी खुले रहते हैं।
हालांकि, इस मॉडल की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है। स्टोर की सही लोकेशन, ग्राहकों की आवाजाही, सामान की बिक्री, किराया, कर्मचारियों का खर्च और सप्लाई चेन का प्रबंधन इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

2021 में भारत आया था 7-Eleven

7-Eleven ने अक्टूबर 2021 में भारत में अपना पहला स्टोर शुरू किया था। भारत में कंपनी ने रिलायंस रिटेल के साथ साझेदारी के जरिए प्रवेश किया।
रिलायंस रिटेल के पास भारतीय बाजार की समझ, सप्लाई चेन और रिटेल कारोबार का अनुभव था। दूसरी ओर, 7-Eleven के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कन्वीनियंस स्टोर चलाने का अनुभव था। दोनों कंपनियों की साझेदारी से उम्मीद थी कि भारत में एक नया रिटेल मॉडल लोकप्रिय हो सकता है।
शुरुआत में इस ब्रांड ने मुंबई में अपनी मौजूदगी बनाई, और बाद में पुणे तक विस्तार किया। इसका उद्देश्य ग्राहकों को जल्दी खरीदारी करने की सुविधा देना था।
लेकिन भारत का बाजार दूसरे देशों से काफी अलग है। यहां मोहल्ले की किराना दुकानें पहले से मौजूद हैं, जहां लोग रोजमर्रा का सामान आसानी से खरीद सकते हैं। साथ ही, ग्राहकों के पास बड़े सुपरमार्केट, स्थानीय मिनी स्टोर और ऑनलाइन डिलीवरी जैसे कई विकल्प भी हैं।

आखिर क्यों बंद हुए 7-Eleven के सभी 31 स्टोर?

किसी भी कंपनी के कारोबार बंद होने के पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं। इसलिए 7-Eleven के मामले में भारतीय बाजार की परिस्थितियों और बिजनेस मॉडल को समझना जरूरी हो जाता है।

1. भारत में किराना दुकानों से कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारत में किराना दुकानें केवल सामान बेचने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय बाजार का अहम हिस्सा भी हैं। कई मोहल्लों में ग्राहक दुकानदार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और जरूरत पड़ने पर उधार भी ले सकते हैं।
किराना दुकानें अक्सर कम जगह में और स्थानीय स्तर पर संचालित होती हैं। वहीं, व्यवस्थित रिटेल स्टोर को किराया, स्टाफ, बिजली और दूसरे संचालन संबंधी खर्च उठाने पड़ते हैं।
ऐसे में 7-Eleven जैसे ब्रांड के लिए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ लागत को नियंत्रित करना भी जरूरी था।

2. क्विक कॉमर्स का तेजी से बढ़ना

पिछले कुछ वर्षों में भारत में ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक कॉमर्स का उपयोग बढ़ा है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों को ऐप के जरिए रोजमर्रा का सामान ऑर्डर करने की सुविधा देते हैं।
अब कई ग्राहक छोटे-मोटे सामान के लिए भी घर से बाहर जाने के बजाय मोबाइल से ऑर्डर करना पसंद करते हैं।
हालांकि, ऑनलाइन डिलीवरी और फिजिकल स्टोर एक जैसा बिजनेस मॉडल नहीं है। फिर भी, दोनों के बीच ग्राहकों के समय, सुविधा और खरीदारी के अनुभव को लेकर मुकाबला होता है।
लेकिन भारत में कारोबार बंद होने की मुख्य वजह केवल क्विक कॉमर्स नहीं, बल्कि बाजार की इन परिस्थितियों से जुड़ी कई चुनौतियां भी रहीं।

3. स्टोर की लोकेशन और संचालन का खर्च

कन्वीनियंस स्टोर के बिजनेस में लोकेशन की अहम भूमिका होती है। स्टोर ऐसी जगह होना चाहिए जहां पर्याप्त संख्या में ग्राहक आते-जाते हों और खरीदारी की नियमित मांग बनी रहे।
अगर किसी स्टोर पर बिक्री उम्मीद से कम होती है, तो किराया, बिजली, कर्मचारियों की सैलरी और स्टॉक मैनेजमेंट जैसे खर्च मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।
इसके अलावा, स्टोर में रखे खाने-पीने के कुछ उत्पादों की बिक्री समय पर होना भी जरूरी है। बिक्री कम होने पर सामान खराब होने या स्टॉक प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
हालांकि, 7-Eleven के प्रत्येक स्टोर की बिक्री और लागत का सार्वजनिक रूप से विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध न होने के कारण यह तय नहीं किया जा सकता कि किस स्टोर पर कितनी वित्तीय चुनौती थी।

4. भारतीय ग्राहकों की खरीदारी की आदतें

भारत में ग्राहक सामान खरीदते समय कीमत, मात्रा और सुविधा को महत्व देते हैं। कई लोग दैनिक जरूरतों का सामान एक ही दुकान से खरीदते हैं, जबकि कुछ ग्राहक सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे बाजार में किसी विदेशी ब्रांड के लिए केवल अपना नाम और अंतरराष्ट्रीय पहचान लेकर आना पर्याप्त नहीं होता। उसे स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक उत्पादों, कीमतों और सेवाओं को भी ढालना पड़ता है।
7-Eleven के लिए भी यह जरूरी था कि ग्राहक उसके स्टोर को स्थानीय दुकानों और दूसरे विकल्पों के मुकाबले उपयोगी समझें।

रिलायंस रिटेल के साथ साझेदारी का क्या हुआ?

भारत में 7-Eleven का संचालन रिलायंस रिटेल के साथ साझेदारी के जरिए किया जा रहा था। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय बाजार में ब्रांड के स्टोर खोलना और कारोबार का विस्तार करना था।
लेकिन अब भारत में इसके सभी 31 स्टोर बंद हो चुके हैं और दोनों कंपनियों के बीच इस कारोबार से जुड़ी साझेदारी समाप्त हो गई है। इससे साफ है कि भारतीय बाजार में टिकना 7-Eleven के लिए मुख्य चुनौती रही है।
यह घटनाक्रम बताता है कि किसी बड़े रिटेल नेटवर्क के साथ साझेदारी होने के बावजूद नए बिजनेस मॉडल की सफलता निश्चित नहीं होती। बाजार की मांग, लागत, ग्राहकों की पसंद और लंबे समय तक कारोबार को लाभदायक बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

क्या भारत में विदेशी रिटेल कंपनियों के लिए जगह नहीं है?

7-Eleven के कारोबार बंद होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में विदेशी रिटेल कंपनियों के लिए अवसर खत्म हो गए हैं।
भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है, जहां लोगों की खरीदारी की जरूरतें लगातार बदल रही हैं। ऑनलाइन शॉपिंग, सुपरमार्केट, डिस्काउंट स्टोर और विशेष उत्पाद बेचने वाले ब्रांडों के लिए अलग-अलग अवसर मौजूद हैं।
लेकिन भारतीय बाजार में सफल होने के लिए कंपनियों को स्थानीय परिस्थितियों को समझना पड़ता है। ग्राहकों को किस कीमत पर सामान चाहिए, वे किस तरह खरीदारी करते हैं और उन्हें कौन-सी सुविधाएं उपयोगी लगती हैं, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
किसी मॉडल की विदेश में सफलता इस बात की गारंटी नहीं देती कि वह भारत में भी उसी तरह काम करेगा। यहां कारोबार बढ़ाने के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीति बनाना महत्वपूर्ण है।

7-Eleven की भारत से विदाई से क्या सीख मिलती है?

7-Eleven की कहानी उन कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो भारत में अपना कारोबार शुरू करना चाहती हैं।
पहली बात, किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले बाजार की वास्तविक मांग समझना जरूरी है। दूसरी बात, ग्राहकों को ऐसा फायदा देना चाहिए जो उन्हें पहले से उपलब्ध विकल्पों में आसानी से न मिलता हो। तीसरी बात, कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ लागत और मुनाफे पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए।
इसके अलावा, किसी कंपनी के लिए केवल अधिक स्टोर खोलना ही सफलता नहीं है। असली सफलता तब होती है जब स्टोर ग्राहकों की जरूरत पूरी करें और लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बने रहें।

निष्कर्ष

7-Eleven ने अक्टूबर 2021 में भारत में अपना सफर शुरू किया था। रिलायंस रिटेल के साथ साझेदारी के जरिए कंपनी ने भारतीय कन्वीनियंस स्टोर बाजार में जगह बनाने की कोशिश की, लेकिन अंततः इसके सभी 31 स्टोर बंद हो गए।
भारतीय बाजार में स्थानीय किराना दुकानों की मजबूत मौजूदगी, ऑनलाइन डिलीवरी के बढ़ते विकल्प और फिजिकल स्टोर चलाने की लागत जैसे कारक इस तरह के बिजनेस के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनमें से किसी एक कारण को 7-Eleven के कारोबार बंद होने की एकमात्र वजह नहीं कहा जा सकता।
इस पूरी कहानी से एक बात साफ होती है: भारत जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी बाजार में सिर्फ ब्रांड पहचान काफी नहीं होती। सफलता तभी मिलती है जब बिजनेस मॉडल स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों और बाजार की वास्तविकताओं से मेल खाता हो। 7-Eleven की भारत में असफलता भी यही दर्शाती है।

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