अगर आप IPO में निवेश करते हैं, तो Lenskart का नाम सुनकर आपकी आँखों में चमक जरूर आई होगी। इसके IPO को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह था, लेकिन आखिरी समय में एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। दरअसल, Lenskart का Grey Market Premium (GMP) अचानक से 70% तक गिर गया है, जिसका मतलब है कि लिस्टिंग के दिन मिलने वाले मुनाफे की उम्मीद अब बहुत कम रह गई है।

लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि GMP के गिरने के बावजूद इस IPO की डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। निवेशकों ने इसे 28.3 गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया है, जो कि एक शानदार आंकड़ा है। तो सवाल यह उठता है कि आखिर क्या चल रहा है? क्या Lenskart में निवेश करना अभी भी सही रहेगा? आइए आज हम इस पूरी स्थिति को विस्तार से समझते हैं।
GMP क्रैश: क्या हुआ अचानक?
इस पूरी कहानी को समझने के लिए पहले GMP के गिरने के आंकड़ों को देखते हैं। जब Lenskart के IPO की घोषणा हुई थी, तब इसका GMP ₹108 था। इसका मतलब यह था कि ट्रेडर्स को उम्मीद थी कि लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत इसके इश्यू प्राइस ₹402 से लगभग ₹108 ऊपर चलने वाली है, यानी करीब 27% का मुनाफा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है और GMP घटकर सिर्फ ₹30 रह गया है, जिससे अब लिस्टिंग प्रॉफिट की उम्मीद महज 8% ही रह गई है। इस तरह देखा जाए तो निवेशकों का जोश लगभग 70% तक ठंडा पड़ गया है।
GMP गिरने के पीछे की वजह क्या है?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर GMP इतना तेजी से क्यों गिरा? विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे मुख्य रूप से दो वजहें हैं। पहली वजह है हाई वैल्यूएशन – Lenskart का शेयर पहले से ही महंगा है, इसलिए शॉर्ट-टर्म में ज्यादा मुनाफे की गुंजाइश कम नजर आ रही है। दूसरी वजह है स्टॉक मार्केट में आई कमजोरी – इन दिनों पूरे शेयर बाजार में निवेशक थोड़ा सतर्क हो गए हैं और नए IPO में जोखिम लेने से हिचकिचा रहे हैं।
फिर भी क्यों है इतनी डिमांड?
यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह सामने आ रही है कि GMP के गिरने के बावजूद IPO को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Lenskart के IPO का साइज ₹7,278 करोड़ का है, लेकिन कुल बिड्स ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की आई हैं, जो कि 28.3 गुना ओवरसब्सक्राइब है। यह एक Substantial नंबर है और यह दिखाता है कि निवेशकों का इस कंपनी में अभी भी भरोसा बना हुआ है।
किसने कितना निवेश किया?
अगर हम डिटेल में देखें तो पता चलता है कि अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों ने अलग-अलग तरीके से रिस्पॉन्ड किया है। इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, जो बड़े फंड लगाते हैं, ने इसे 45 गुना सब्सक्राइब किया है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, जिनमें HNI यानी हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल शामिल हैं, ने 18 गुना सब्सक्राइब किया है। वहीं रिटेल इन्वेस्टर्स, यानी आप और हम जैसे छोटे निवेशकों ने 7.5 गुना सब्सक्राइब किया है। कुल मिलाकर 281 करोड़ शेयरों के लिए बिड्स आईं जबकि सिर्फ 9.97 करोड़ शेयर ही उपलब्ध थे। इससे साफ पता चलता है कि लोग Lenskart के ब्रांड में विश्वास रखते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बाजार के विशेषज्ञों और ब्रोकरेज कंपनियों का इस बारे में क्या कहना है? SBI जैसी बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों का कहना है कि Lenskart एक स्ट्रांग कंपनी है लेकिन शॉर्ट-टर्म गेन्स लिमिटेड हो सकते हैं। ऊपरी प्राइस बैंड पर Lenskart अपने FY25 सेल्स का 10.1 गुना और FY25 EBITDA का 68.7 गुना वैल्यूएशन पर लिस्ट हो रही है। यह साफ दिखाता है कि स्टीप वैल्यूएशन की वजह से शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग प्रॉफिट्स लिमिटेड हैं।
लॉन्ग-टर्म के लिए क्यों है अच्छा निवेश?
हालांकि शॉर्ट-टर्म में मुनाफा कम मिलने की उम्मीद है, लेकिन लॉन्ग-टर्म के लिए Lenskart एक अच्छा निवेश साबित हो सकता है। इसके पीछे की वजह है कंपनी का मजबूत बिजनेस परफॉर्मेंस। Lenskart लगातार अपने बिजनेस नंबर्स में सुधार कर रहा है। इसकी EBITDA मार्जिन, जो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी दिखाता है, FY23 में 7% से बढ़कर FY25 में 14.7% हो गया है। रेवेन्यू ₹6,653 करोड़ है, जो पिछले 2 साल में 32% की CAGR से बढ़ा है। EBITDA ₹971 करोड़ है, जो 3.7 गुना जंप दिखाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नेट प्रॉफिट (PAT) FY25 में ₹297 करोड़ है, जबकि 2 साल पहले कंपनी ₹4 करोड़ के लॉस में थी।
निवेशकों को Lenskart क्यों पसंद आ रहा है?
Lenskart में निवेशकों का भरोसा कायम रहने के पीछे कई कारण हैं। पहला है स्ट्रांग ब्रांड प्रेजेंस – दुनियाभर में 2,700 से ज्यादा स्टोर्स के साथ इसकी ग्लोबल उपस्थिति है, जिनमें से 2,000 स्टोर्स तो भारत में ही हैं। दूसरा है ऑम्नीचैनल मॉडल – यह ब्रांड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से एक्टिव है और इसके टेक-बेस्ड मैन्युफैक्चरिंग से इसे कॉस्ट एडवांटेज भी मिल रहा है। तीसरा कारण है इंटरनेशनल एक्सपेंशन – Lenskart सिंगापुर, UAE और US मार्केट्स में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बना रहा है। Nirmal Bang जैसी जानी-मानी ब्रोकरेज कंपनियों ने Lenskart के बिजनेस को “Resilient” यानी मजबूत बताया है और कहा है कि यह लॉन्ग-टर्म के लिए बना अच्छा बिजनेस है।
तो दोस्तों, अगर हम निष्कर्ष निकालें तो कह सकते हैं कि GMP के गिरने से शॉर्ट-टर्म में लिस्टिंग गेन्स कम मिल सकते हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म के लिए Lenskart एक सॉलिड इन्वेस्टमेंट हो सकता है। अगर आप लॉन्ग-टर्म व्यू रखते हैं और भारत की तेजी से बढ़ती आईवियर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं, तो Lenskart आपके पोर्टफोलियो के लिए एक अच्छा एडिशन साबित हो सकता है!



